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होलिका दहन का शुभ समय नौ मार्च को प्रदोष में शाम 5.30 से 6.30 बजे तक, दस को रंगोत्सव

जीजीएस न्यूज़ 24 जौनपुर ब्यूरो चीफ दीपक कुमार विश्वकर्मा

जौनपुर: सनातन धर्म के चार प्रमुख त्योहारी उत्सवों में रंग पर्व होली सर्व प्रमुख है। फागुन पूर्णिमा पर होलिका दहन कर अगली सुबह चैत्र कृष्ण प्रतिपदा में होली खेलने की परंपरा है। इस बार फागुन पूर्णिमा तिथि नौ मार्च को और चैत्र कृष्ण प्रतिपदा दस को मिल रही है। ऐसे में होलिका दहन नौ मार्च को होगा और होली 10 मार्च को खेली जाएगी।

होलिका दहन में पूर्वविद्धा प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा ली जाती है। फागुन पूर्णिमा तिथि आठ-नौ मार्च की रात 1.42 बजे लग रही है जो नौ मार्च को रात 11.27 बजे तक रहेगी। खास यह कि फागुन पूर्णिमा पर रहने वाली भद्रा इस बार दोपहर 12.37 पर समाप्त हो जा रही है। ऐसे में होलिका दहन का शुभ समय प्रदोष में शाम 5.30 से 6.30 बजे तक रहेगा। रात 11.27 बजे से पहले होलिका दहन कर लेना होगा। ख्यात ज्योतिषाचार्य आलोक शुक्ला के अनुसार शास्त्रों में प्रतिपदा, चतुर्दशी, दिन व भद्रा में होलिका जलाना सर्वथा त्याज्य है। इसकी अनदेखी करने से जनसमूह का नाश होता है। होलिका दहन के साथ ही फागुन शुक्ल अष्टमी से लगा होलाष्टक खत्म हो जाएगा।

होली की कथा

सप्तदीप का राजा हिरण्य कश्यप खुद को ईश्वर मानते थे। उसका पुत्र प्रह्लाद देवोपासक था। प्रह्लाद की श्रीहरि के प्रति असीम श्रद्धा-भक्ति के कारण अग्नि में न जलने का वरदान के बाद भी बुआ होलिका जब उसे अग्नि में लेकर बैठी तो वह खुद स्वाहा हो गई लेकिन प्रह्लाद बच गए। बुराई पर अच्छाई की जीत के संदेश संग विजय प्रतीक हर वर्ष होली मनाने की परंपरा का जन्म हुआ। वह दिन फागुन पूर्णिमा ही थी, तभी से फागुन पूर्णिमा पर होलिका दाह कर दूसरे दिन रंगोत्सव की परंपरा है। स्नान दान की पूर्णिमा नौ मार्च को मनाई जाएगी। होली पर काशी में 64 योगिनियों के दर्शन का विधान है।

होलिका दहन का मंत्र

होलिका दहन के समय ओम होलिकाये नम: मंत्र का जाप करना चाहिए।

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